मुंबई: शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच LIC (लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन) को हाल के दो कारोबारी सत्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसकी प्रमुख वजह ITC के शेयर में आई तेज गिरावट है, जिसने LIC के पोर्टफोलियो को प्रभावित किया और उसके शेयर मूल्य में करीब ₹11,460 करोड़ की कमी आई है।
बाज़ार के विशेषज्ञों का मानना है कि ITC के शेयरों में यह गिरावट कंपनी के Q3 नतीजों, उद्योग प्रतिस्पर्धा, और मुद्रास्फीति के असर जैसे कारकों से जुड़ी हुई है। इससे ना केवल ITC को बल्कि उन संस्थाओं को भी नुकसान हुआ है जिनके पास ITC के बड़े शेयर हैं — जिनमें LIC का बड़ा हिस्सा शामिल है।
LIC को कैसे हुआ नुकसान?
LIC भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है और इसके पास सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनियों के बड़े शेयर पोर्टफोलियो हैं। परंपरागत रूप से यह विभिन्न सेक्टर्स में निवेश करती है, जिसमें प्रमुख रूप से FMCG कंपनियाँ भी शामिल हैं। ITC के शेयर की गिरावट का सीधा असर LIC की कुल संपत्ति और निवेश मूल्यांकन (NAV) पर पड़ा, जिससे उसके बाज़ार मूल्य में ₹11,460 करोड़ के करीब कमी दर्ज की गई।
बाजार विश्लेषक कहते हैं कि
✔️ ITC के शेयरों में अस्थिरता
✔️ कंपनी की ग्रोथ रणनीति पर उठ रहे सवाल
✔️ निवेशकों की बेचैनी
जैसी वजहों से ITC के शेयरों पर दबाव रहा, जिसका प्रत्यक्ष असर LIC के निवेश पर पड़ा।
ITC शेयर की गिरावट के कारण
कुछ प्रमुख कारण जो निवेशकों और विशेषज्ञों द्वारा ज़िम्मेदार बताए जा रहे हैं:
🔹 मुंहासे कीमतें और खाद्य क्षेत्र की चुनौतियाँ
🔹 बाजार में प्रतिस्पर्धा का बढ़ना
🔹 निगम के लाभ वृद्धि और भविष्य की उम्मीदों पर संदेह
🔹 सेंसेक्स और निफ्टी में समग्र गिरावट
इन सभी कारणों का संयुक्त प्रभाव ITC के शेयरों पर पड़ा और वह गिरावट को रोकने में असमर्थ रहा।
निवेशकों की प्रतिक्रिया
LIC सहित कई बड़े निवेशकों ने अपने निवेश कमाए हैं और शेयर बाजार की इस गिरावट के कारण चिंता जताई है। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक अब धीरे-धीरे विविध निवेश रणनीति अपनाने की सोच रहे हैं, ताकि इसी तरह के उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसानों से बचा जा सके।
क्या आगे सुधार की उम्मीद है?
बाजार के समीक्षकों का मानना है कि अगर ITC के Q4 परिणाम बेहतर आते हैं, और सरकार की आर्थिक नीतियाँ स्थिर बनी रहती हैं, तो शेयरों में सुधार की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं। वहीं LIC जैसे बड़े संस्थागत निवेशक भी पोर्टफोलियो में पुनः संतुलन स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय है कि
✔️ निवेश में धैर्य
✔️ विविध पोर्टफोलियो
✔️ आर्थिक संकेतकों की निगरानी
इनसे भविष्य में बेहतर परिणाम की संभावना है।
