गोंदिया: सालेकसा तहसील के तीन धान खरीदी सहकारी संस्थाओं से जुड़े 28 संचालकों के खिलाफ बड़े पैमाने पर धान बोनस घोटाले में मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान यह पता चला कि इन संस्थाओं ने सरकार द्वारा धान उत्पादक किसानों को दिए जाने वाले बोनस के पैसे को फर्जी किसानों के नाम पर उठाकर कुल 1 करोड़ 13 लाख 86 हजार रुपये की धोखाधड़ी की है।
यह घोटाला बोनस योजना का लाभ पाने के लिए किया गया, जिसमें सरकारी नियमों के मुताबिक धान उत्पादक किसानों को बोनस रकमें दी जाती हैं। लेकिन इन संस्थाओं ने बोगस (बनावट) किसानों के नाम, गलत 7/12 रिकॉर्ड्स, और गैर-कृषि भूमि को कृषि भूमि दिखाकर बोनस का लाभ लिया, ऐसा जांच में सामने आया है।
तीन सहकारी संस्थाओं के भीतर यह घोटाला निम्न प्रकार से किया गया:
🔹 मानव बहुउद्देशीय सहकारी संस्था, रामाटोला (पांढरी) ने करीब ₹63,75,200 रुपये का बोनस फर्जी तरीके से प्राप्त किया।
🔹 सालेकसा सहकारी भात गिरणी संस्था, कोटजंभोरा ने करीब ₹30,55,600 रुपये का घोटाला किया।
🔹 कावेरी कृषि साधन सामग्री सहकारी संस्था, बाम्हणी (गिरोला) ने करीब ₹19,55,200 रुपये का धोखाधड़ी किया।
मामला दर्ज कैसे हुआ?
यह कार्रवाई निरीक्षण अधिकारी सतिश मदन डोंगरे की शिकायत के आधार पर की गई। शिकायतों के बाद सरकार ने जांच निर्देशित किए और सालेकसा पुलिस स्टेशन में 24 दिसंबर को फर्जी बोनस लेने के आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। जांच पुलिस निरीक्षक बुराडे कर रहे हैं।
आरोपीयों में संस्थाओं के पदाधिकारी और संचालक शामिल हैं, जिनके नामों में कैलाश अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, रुपचंद मोहारे, रमेशकुमार अग्रवाल, लोकनाथ पटले, मनोज इडपाते, गुमानसिंग उपराडे और अन्य शामिल हैं।
क्या है बोनस घोटाले की वजह?
सरकार धान उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन स्वरूप बोनस देती है। इस घोटाले में आरोप है कि
✔️ फर्जी किसान पंजीकरण कराया गया
✔️ वास्तविक भू-भूमि रिकॉर्ड का गलत इस्तेमाल किया गया
✔️ बोनस राशि को गलत लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया
इसी वजह से सरकारी कोष को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
क्या हो सकता है आगे?
घोटाला खुलने के बाद विभागीय जांच जारी है और आगे संभव है कि
✔️ आरोपियों के खिलाफ कड़ी पुलिस कार्रवाई
✔️ सरकारी धन वसूलने की अन्य प्रक्रियाएँ
✔️ संबंधित संस्थाओं पर आइनी प्रतिबंध लगाए जाएं
इस मामले ने खाद्य एवं कृषि विभाग की गहन समीक्षा की आवश्यकता को उजागर किया है, ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों से बचा जा सके।
