The GD News

लखनदूर में 9,000 क्विंटल चावल सड़ गया; भंडारण की लापरवाही पर सवाल, जिम्मेदार कौन?

लखनदूर (भंडारा): अन्नपुरवठा विभाग के गोदाम में रखे गए लगभग 9,000 क्विंटल चावल खराब होने का मामला सामने आया है। यह चावल पहले किराए के गोदाम में रखा गया था, जहां इसे आगे अन्य जिलों में भेजकर गरीबों और बीपीएल परिवारों तक पहुंचाया जाना था। लेकिन गोदाम की बदहाल स्थिति और बारिश के पानी के रिसाव की वजह से यह चावल बुराई (मोल्ड) का शिकार हो गया, जिससे भारी अनाज नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है।

समस्या यह है कि यह चावल सीएमआर (CMR) अंतर्गत अन्नपुरवठा विभाग के भाड़े के गोदाम में रखे गए थे, जिसे पिछले 6 महीनों से कृषि उत्पादन बाजार समिति के पास किराए पर लिया गया था। इस अवधि में गोदाम की नियमित देखरेख नहीं की गई, जिससे गोदाम की छत से पानी रिसकर चावल पर फैल गया और उसमें फफूंद लग गई


किस बात ने चावल नष्ट किया?

देखा गया है कि:

  • गोदाम बारिश के पानी से गीला हो गया था
  • चावल को समय पर उठाकर सुरक्षित स्थान पर न ले जाने के कारण वह सड़ा
  • नमी व खराब भंडारण की वजह से अनाज पर मोल्ड फैल गया
    सभी कारण मिलकर चावल के खराब होने की स्थिति बनाई।

लखनदूर तहसील कार्यालय के अन्नपुरवठा निरीक्षक धीरज मेश्राम ने बताया कि चावल को इसके बाद राइस मिल में भेजा जा रहा है ताकि उसे फिर से छाना और पॉलिश किया जा सके, लेकिन सवाल यह उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर खराब चावल को पहले ही सुरक्षित जगह पर क्यों नहीं रखा गया।


लापरवाही पर उठ रहे सवाल

यह चावल मूल रूप से गरीब व बीपीएल श्रेणी के लोगों को वितरण के लिए रखा गया था। अन्नपुरवठा विभाग पर भारी राशि खर्च कर खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बावजूद इस अनाज के सड़ने से यह स्पष्ट होता है कि गोदाम प्रबंधन में गंभीर खामियाँ थीं।

अब सवाल यह है कि:

  • कौन जिम्मेदार होगा?
  • क्या विभाग द्वारा उचित भंडारण व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी?
  • यदि गोदाम खराब है तो इसका क्या निगरानी तंत्र था?
  • विभाग इस नुकसान की भरपाई करेगा या नहीं?

जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के जिम्मे यह अनाज सुरक्षित रखना था, उनके खिलाफ कार्रवाई की ज़रूरत पर कई लोगों ने चिंता व्यक्त की है।


क्या अब अनाज आगे भेजा जाएगा?

लखनदूर अन्नपुरवठा विभाग का कहना है कि अब यह चावल फिर से छान कर पोलिश किया जाएगा तथा उसके बाद ही आगे वितरण के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। वहीं, यह प्रक्रिया चरणबद्ध है और इसके लिए विशेषज्ञ मिलों की मदद ली जा रही है।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस पूरे नुकसान की जिम्मेदारी किस पर आएगी और विभाग द्वारा किस प्रकार की सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top