नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान आज नेता विपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खास किताब लोकसभा में देने की चुनौती दी है। राहुल गांधी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री लोकसभा में बोलने आएँ, तो वे पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक बुक उन्हें व्यक्तिगत रूप से देंगे ताकि वे उसे पढ़ सकें और देश को “सच” जानने का मौका मिले।
राहुल गांधी का यह बयान बजट सत्र के बीच तब आया जब उन्होंने संसद में एक आपसी विवाद और हंगामा के बीच यह पुस्तक उठाकर सवाल खड़े किए कि सरकार ने 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद (Ladakh Standoff) के दौरान जिम्मेदारी पूरी तरह नहीं निभाई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस पुस्तक में स्पष्ट किया गया है कि उस समय सेना को अकेला महसूस हुआ और प्रधानसेनाध्यक्ष का नेतृत्व पर्याप्त समर्थन नहीं पाया।
📘 क्या है विवाद?
राहुल गांधी ने लोकसभा में जनरल नरवणे की अनप्रकाशित “memoir” का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उस कठिन दौर में सही दिशा निर्देश नहीं दिए। उन्होंने कहा कि किताब में पूर्व सेना प्रमुख ने विस्तार से बताया है कि सरकार किस तरह के फैसलों से भारत-चीन गतिरोध से निपटा।
लेकिन सदन में उनका यह प्रयास अनुशासन नियमों के कारण रोका गया, क्योंकि सदस्य बिना नियम के किताब के अंश पढ़ना नहीं चाहता था। इसके बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच हंगामा और व्यवधान के कारण बहस कुछ समय के लिए स्थगित भी हुई। आठ विपक्षी सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया गया था।
राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि प्रधानमंत्री लोकसभा में आने से हिचक रहे हैं, लेकिन अगर वे आएँ तो वह उन्हें यह किताब देंगे ताकि वे इसका अध्ययन करें। उन्होंने यह भी युवा नागरिकों से अपील की कि वे खुद पुस्तक को पढ़ें और तथ्यों को समझें।
🏛️ राजनीतिक प्रतिक्रिया
सत्तापक्ष के कुछ सांसदों ने राहुल गांधी की बातों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि अनप्रकाशित किताब से हवाला देना ठीक नहीं, तथा संसद की प्रक्रिया का सम्मान करना जरूरी है। इस विवाद ने बजट सत्र के दौरान राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।
