ब्रिटेन ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक रूसी जासूसी जहाज़ ने हाल ही में स्कॉटलैंड के पास RAF (रॉयल एयर फ़ोर्स) के पायलटों पर लेज़र किरणें तानकर ब्रिटिश निगरानी मिशन में बाधा डालने की कोशिश की। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने इस कार्रवाई को “बेहद खतरनाक” बताया और साफ़ चेतावनी दी कि यूके जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रक्षा मंत्री के अनुसार, रूसी इंटेलिजेंस-गैदरिंग शिप ‘यंतर’ (Yantar) हाल ही में ब्रिटिश जलक्षेत्र के पास सक्रिय था और उस पर निगरानी रखी जा रही थी। इसी दौरान जहाज़ से लेज़र किरणें दागी गईं। यह इस साल दूसरी बार है जब यंतर यूके क्षेत्र के पास देखा गया है।
हीली ने कहा कि इस घटना ने RAF पायलटों की सुरक्षा को सीधा खतरा पहुँचाया। उन्होंने बताया कि रॉयल नेवी की एक फ्रिगेट और RAF का Poseidon P-8 विमान जहाज़ की हर गतिविधि पर नज़र रखने के लिए तैनात किए गए थे।
डाउनिंग स्ट्रीट में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने रॉयल नेवी के “रूल्स ऑफ़ एंगेजमेंट” में बदलाव किया है ताकि जहाज़ को ब्रिटिश जलसीमा में और करीब से ट्रैक किया जा सके।
यंतर, जो रूस की GUGI (डीप सी रिसर्च डायरेक्टरेट) के अधीन संचालित होता है, शांति के समय निगरानी और संघर्ष के समय तोड़फोड़ मिशन के लिए जाना जाता है। हीली ने कहा:
“पुतिन को मेरा संदेश स्पष्ट है—हम आपको देख रहे हैं, आपकी हर गतिविधि पर नज़र है। अगर यंतर दक्षिण की ओर बढ़ा, तो हम तैयार हैं। हमारे सैन्य विकल्प भी तैयार हैं, लेकिन मैं उन्हें सार्वजनिक नहीं करूँगा।”
रूस ने किया खंडन
रूसी दूतावास ने यूके के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि रूस “ब्रिटिश जल या संचार प्रणालियों में कोई दिलचस्पी नहीं रखता” और यह कि उसके किसी कदम से ब्रिटेन की सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने का उद्देश्य नहीं है।
दूतावास ने उल्टा लंदन पर आरोप लगाया कि वह “रूस-विरोधी माहौल बनाकर यूरोपीय सुरक्षा को अस्थिर कर रहा है” और ब्रिटेन को “उकसाने वाली गतिविधियों से बचने” की सलाह दी।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यंतर ने 2 नवंबर के बाद से अपना लोकेशन सिग्नल प्रसारित नहीं किया है। डच नेवी का कहना है कि उसने 6 नवंबर को इस जहाज़ को नॉर्थ सी से बाहर एस्कॉर्ट किया था।
यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब यूके यूरोपीय संघ के साथ उस समझौते पर काम कर रहा है जिसके तहत ब्रिटिश रक्षा कंपनियाँ अगले साल लॉन्च होने वाली €150 बिलियन की यूरोपीय रक्षा लोन योजना में शामिल प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगा सकेंगी।
