भंडारा: जैव विविधता की रक्षा और वन्यजीवों को अवैध जाल तथा इलेक्ट्रिक तार से होने वाले खतरों से बचाने के लिए भंडारा जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत एंटी-स्नायर (जाल हटाने) और एंटी-इलेक्ट्रोक्यूशन (विजली के खतरों को हटाने) के काम किए जा रहे हैं, जिससे वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित किया जा सके।
वन्यजीव संरक्षण संगठनों और वन विभाग की टीम मिलकर ग्रामीण इलाकों और वन सीमा वाले क्षेत्रों में जंगली जानवरों के आवागमन मार्गों पर लगे स्नायर (छुपे हुए जाल) और अवैध रूप से बिछाई गई विद्युत प्रवाही बिजली की तारों को हटाने का काम कर रही है। इससे न केवल जानवर फँसने से बचेंगे बल्कि घायल होने या मृत्यु जैसी घटनाएं भी रोकी जा सकेंगी।
क्या है एंटी-स्नायर और एंटी-इलेक्ट्रोक्यूशन अभियान?
✔️ एंटी-स्नायर ड्राइव: जंगली जानवरों के लिए खतरा बन रहे छुपे जाल (snare) को हटाकर इनके फँसने और शिकार होने की घटनाओं को रोकना।
✔️ एंटी-इलेक्ट्रोक्यूशन ड्राइव: खेतों और पिकों की रक्षा के नाम पर लगाए गए विद्युत तारों को सुरक्षित रूप से हटाना ताकि जानवरों को इलेक्ट्रिक शॉक न लगे।
वन्यजीव संरक्षण संस्थाओं के अनुसार ऐसे अभियान से वन्यजीवों की जान को गंभीर खतरा कम होता है और स्थानीय पारिस्थितिकी भी संतुलित रहती है।
स्थानीय लोगों की भूमिका
स्थानीय ग्रामीण और जंगल के निकट रहने वाले लोग भी इस अभियान में हाथ बंटा रहे हैं। वे अपनी जानकारी साझा कर रहे हैं कि कहां-कहां अवैध जाल या खतरनाक तार मौजूद हैं, ताकि उसे हटाया जा सके। इस साझेदारी से अभियान को गति मिली है और आगे भी इसकी सततता बनाए रखने की योजना है।
📌 संक्षेप:
भंडारा जिले में चल रहे एंटी-स्नायर और एंटी-इलेक्ट्रोक्यूशन अभियान का उद्देश्य वन्यजीवों को अवैध जाल और विद्युत तारों से सुरक्षित रखना है। स्थानीय वन विभाग और संरक्षण समूह मिलकर इस दिशा में काम कर रहे हैं,जिससे वन्यजीवों के लिए सुरक्षित जंगल सुनिश्चित किया जा सके।
