वाशिंगटन / नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार ने संकेत दिया है कि वह वेनेज़ुएला के कच्चे तेल को नियंत्रित रूप से भारत सहित अन्य देशों को बेचने के लिए तैयार है। यह पहल वेनेज़ुएला के तेल उद्योग पर अमेरिकी नियंत्रण और ताज़ा राजनीतिक समझौतों के बाद सामने आई है, जिसमें वेनेज़ुएला की तेल तस्करी और राजस्व पर अमेरिका का नियंत्रण शामिल है।
अमेरिका ने हाल ही में वेनेज़ुएला से 30 से 50 मिलियन बैरल तक के तेल के निर्यात पर सहमति जताई है, जिसका अधिकांश हिस्सा अमेरिका को भेजा जाएगा। इसके अलावा, वरिष्ठ ट्रंप प्रशासन अधिकारियों का कहना है कि नियम और नियंत्रण के तहत वे वेनेज़ुएला का तेल भारत जैसे देशों को भी बेचने के लिए तैयार हैं, जिससे भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को विविध स्रोतों से पूरा कर सकता है।
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस्टोफर राइट ने बयान दिया है कि वेनेज़ुएला का तेल फिर से वैश्विक बाजार में आना शुरू कर रहा है, लेकिन यह केवल अमेरिकी सरकार द्वारा नियंत्रित व्यवस्था के अधीन होगा। उन्होंने कहा है कि यह व्यवस्था तेल की बिक्री को कानूनी रूप से मान्यता देगी और राजस्व का उपयोग वेनेज़ुएला के लोगों के हित में सुनिश्चित करेगी।
ट्रम्प प्रशासन की इस रणनीति का उद्देश्य न केवल तेल की आपूर्ति बहाल करना है, बल्कि वेनेज़ुएला की आर्थिक स्थिति को स्थिर करना और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपने प्रभाव को मजबूत करना भी है। इससे पहले अमेरिका ने वेनेज़ुएला के राजस्व और तेल टैंकरों को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें तेल राजस्व को अमेरिकी नियंत्रण में रखना भी शामिल है।
भारत पहले वेनेज़ुएला के सबसे बड़े तेल खरीदारों में से एक रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते यह व्यापार कम हो गया था। अब यह कदम भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए एक संभावित अवसर पैदा कर सकता है, जिससे भारत अपनी तेल आयात विविधता बढ़ा सकता है।
✅ सारांश:
- ट्रंप प्रशासन वेनेज़ुएला के तेल को नियंत्रित तरीके से भारत को बेचने को तैयार है।
- नया नियमन तेल व्यापार को वैधानिक रूप से संभव बनाएगा।
- इससे भारत को ऊर्जा स्रोतों में विविधता पाने में मदद मिल सकती है।
