मुंबई, 23 जनवरी 2026 — महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के मंत्री छगन भुजबळ को महाराष्ट्र सदन घोटाले के एक लंबे चल रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में विशेष न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है। इससे पहले वह इसी घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के मामले में पहले ही बरी हो चुके थे, और अब ED के PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले से भी उन्हें कानूनी राहत मिल गई है।
🧑⚖️ कोर्ट का फैसला
स्पेशल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मूल अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) इस मामले में साबित नहीं हुआ, इसलिए उसी आधार पर दर्ज ED का मनी लॉन्ड्रिंग केस आगे नहीं चल सकता। इसलिए भुजबळ सहित अन्य आरोपियों को निर्दोष करार दे दिया गया।
🧾 मामला क्या था?
- यह मामला महाराष्ट्र सदन घोटाले से जुड़ा था, जिसमें यह आरोप था कि 2006-07 में ‘महाराष्ट्र सदन’ के निर्माण के लिए दिए गए सरकारी ठेकों में अनुचित लाभ लिया गया।
- ACB ने वर्ष 2015 में घोटाले के आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया और इसके बाद ED ने उसी आधार पर 2016 में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए।
- भुजबळ और उनके परिवार के सदस्य (जैसे उनके पुत्र और भतीजा) लंबे समय से इन मुकदमों का सामना कर रहे थे।
📌 पहले भी मिली थी राहत
भुजबळ को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के केस में पहले ही निर्दोष करार दिया जा चुका था। उस फैसले के बाद ED के मनी-लॉन्ड्रिंग कार्यवाही के कानूनी आधार पर सवाल उठते रहे, और अब उसी वजह से इस बड़े फैसले में उन्हें राहत मिली है।
🧑⚖️ कोर्ट ने क्या कहा?
विशेष न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जब प्रेडिकेट ऑफेंस यानी मूल अपराध ही नहीं बनता, तो उसके आधार पर दर्ज किए गए मनी-लॉन्ड्रिंग केस को आगे चलाना न्यायसंगत नहीं है. इसी तर्क के आधार पर भुजबळ और अन्य आरोपियों को बरी किया गया।
📌 सार — मुख्य बातें
- मामला: महाराष्ट्र सदन घोटाला और उसके बाद ED द्वारा दर्ज मनी-लॉन्ड्रिंग केस।
- नेता: NCP के वरिष्ठ नेता छगन भुजबळ।
- निर्णय: विशेष न्यायालय ने ED के मामले में भुजबळ को दोषमुक्त किया।
- कारण: मूल अपराध (predicate offence) नहीं बनना।
